Tuesday, October 30, 2007

मेरा हमसफ़र

एक हल्का सा ख्याल है,
एक नाज़ुक सा सपना है,
रंगों में घुलता है ...

एक पालना है मन का,
एक घोंसला है जान का,
हातों में पनपता है....

एक चाँद है कल का,
एक सूरज है आज का,
पलकों में जलता है....

एक मैं हूँ आज की,
एक तू है कल का,
जो मेरे साथ चलता है...

Thursday, October 25, 2007

(sigh) Triveni

घाटे हो गए कुछ अजीब सौदों में ....
पर ये घाटे भी प्यारे लगे...
दर्द ये जीवन के दवा से लगे.....

पर्छायिने जब बात की....
तो चुपके से हसीं दबाई,
मुझसे शरारत की, मेरी परछाई ने

दिमाग के पिंजरे में एक छोटा सा दिल कैद है,
चाहता है कि तोड़ दे उसे,
मगर दुनिया के डर से बंद भी रहना चाहता है.....