मन तो वहीं छूट गया है जहाँ मेरा घर है।
अलग राह की सीमा अब दिखी है जब घर नही पासमें।
लौट के जाऊँ तो कैसे,
मायने जो बदल गए हैं .....
हर राह जो बदल गई है
हर मंजिल जो बदल गई है......
बरखा
अलग राह की सीमा अब दिखी है जब घर नही पासमें।
लौट के जाऊँ तो कैसे,
मायने जो बदल गए हैं .....
हर राह जो बदल गई है
हर मंजिल जो बदल गई है......
बरखा
